क्रिसमस 2025: भारत में ईसाई समुदाय पर हमलों की रिपोर्ट्स से गरमाया माहौल, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठी चिंता
दुनिया देख रही संगठनों का हुड़दंग, भारत की छवि हो रही धूमिल

क्रिसमस का त्यौहार जो शांति और सौहार्द का प्रतीक माना जाता है, इस वर्ष भारत के कई हिस्सों में अशांति और विवादों के बीच गुजरा। देश के विभिन्न राज्यों से क्रिसमस समारोहों के दौरान व्यवधान, चर्चों में तोड़फोड़ और ईसाई समुदाय के खिलाफ उत्पीड़न की खबरें सामने आई हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स ने इन घटनाओं की पुष्टि की है, जिससे न केवल देश के भीतर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
कानून व्यवस्था और बढ़ती घटनाएं
विभिन्न मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्ष 2025 में जनवरी से लेकर नवंबर तक ईसाई समुदाय के खिलाफ हिंसा की सैकड़ों घटनाएं दर्ज की गई हैं। आरोप है कि कई राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानूनों (Anti-conversion laws) का हवाला देकर प्रार्थना सभाओं को रोका जा रहा है और व्यक्तिगत हमले किए जा रहे हैं। क्रिसमस के मौके पर हुई ताज़ा घटनाओं ने कानून व्यवस्था की प्रभावशीलता और अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
देश के विभिन्न हिस्सों में कहां क्या हुआ?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्रिसमस के दौरान देश के अलग-अलग राज्यों में निम्नलिखित प्रमुख घटनाएं दर्ज की गईं।
नागौर, राजस्थान: सेंट जेवियर्स स्कूल (St. Xavier’s School) में क्रिसमस कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर बाहरी तत्वों ने घुसकर तोड़फोड़ की और फर्नीचर पलट दिया। आरोप है कि शिक्षकों और बच्चों को धमकाया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को हिरासत में लिया है।
रायपुर, छत्तीसगढ़: 25 दिसंबर को मैग्नेटो मॉल (Magneto Mall) में 40-50 लोगों की भीड़ ने क्रिसमस ट्री और सांता क्लॉज की सजावट को नष्ट कर दिया। आरोप है कि वहां मौजूद लोगों से धर्म और जाति पूछी गई। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज की है।
पलक्कड़, केरल: क्रिसमस कैरोल गा रहे एक समूह, जिसमें बच्चे भी शामिल थे, पर कथित हमला किया गया। इस घटना ने राज्य में राजनीतिक बहस को जन्म दिया है और एक व्यक्ति की गिरफ्तारी भी हुई है।
नलबाड़ी, असम: सेंट मैरीज स्कूल (St. Mary’s School), पानीगांव में क्रिसमस की तैयारियों के दौरान हंगामे और तोड़फोड़ की खबर सामने आई, जिसके बाद समुदाय ने सुरक्षा की मांग की।
जबलपुर, मध्य प्रदेश: एक वायरल वीडियो में स्थानीय राजनीतिक पदाधिकारी द्वारा चर्च के पास एक दृष्टिहीन महिला के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आया, जिसने स्थानीय समुदाय में भय का माहौल पैदा कर दिया।
बरेली (यूपी) और हिसार (हरियाणा): उत्तर प्रदेश के बरेली में सेंट अल्फोंसस कैथेड्रल और हरियाणा के हिसार में सेंट थॉमस चर्च के सामने कथित तौर पर दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा हनुमान चालीसा का पाठ और नारेबाजी की गई। हालांकि, हिसार में पुलिस बल तैनात था, लेकिन इन घटनाओं से तनाव की स्थिति बनी रही।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया और संगठनों की प्रतिक्रिया
भारत में हुई इन घटनाओं पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी प्रमुखता से रिपोर्टिंग की है।
मीडिया कवरेज: ब्रिटेन के द टेलीग्राफ और द इंडिपेंडेंट ने इसे हिंदू सतर्कता समूहों (Vigilante Groups) द्वारा क्रिसमस समारोहों को निशाना बनाने की घटना बताया है। वहीं, अमेरिकी प्रकाशन क्रिश्चियन पोस्ट और तुर्की के टीआरटी वर्ल्ड ने प्रार्थना सभाओं में बाधा और डर के माहौल पर चिंता जताई है।
मानवाधिकार रिपोर्ट्स: अमेरिकी आयोग (USCIRF) की 2025 की रिपोर्ट में भारत को “कंट्री ऑफ पार्टिकुलर कंसर्न” (CPC) घोषित करने की सिफारिश की गई है। ब्रिटेन स्थित संस्था ‘ओपन डोर्स’ ने साल भर में 2,900 से अधिक हमलों का दावा किया है। यूरोपीय संसद में भी इस मुद्दे पर चर्चा की गई है।
सोशल मीडिया पर आक्रोश और भारत की छवि
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर इन घटनाओं को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इन घटनाओं की निंदा की है:
शशि थरूर (सांसद): उन्होंने केरल और अन्य राज्यों की घटनाओं पर दुख जताते हुए सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की।
सागरिका घोष (सांसद): उन्होंने इन घटनाओं के दस्तावेजीकरण पर जोर दिया ताकि दुनिया सच्चाई देख सके।
आम जनता की राय: कई उपयोगकर्ताओं ने भारत की तुलना पाकिस्तान और खाड़ी देशों (UAE, सऊदी अरब) से की, जहां क्रिसमस शांतिपूर्ण तरीके से मनाया गया, और भारत में बढ़ती असहिष्णुता पर चिंता व्यक्त की।
सरकार उठाये ठोस कदम
क्रिसमस के दौरान हुई ये घटनाएं भारत की वैश्विक छवि, पर्यटन और कूटनीति के लिए एक चुनौती बन सकती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि कानून का राज स्थापित करने और सभी समुदायों को सुरक्षा का भरोसा दिलाने के लिए सरकार को ठोस और निष्पक्ष कदम उठाने की आवश्यकता है।
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